केरलम विधान सभा चुनाव 2026: केरलम में विधानसभा चुनाव के नज़दीक आते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। विभिन्न दलों के दिग्गज नेता राज्य का दौरा कर मतदाताओं को साधने में जुटे हैं. राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए एलडीएफ (LDF), यूडीएफ (UDF) और एनडीए (NDA) के बीच त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बनी हुई है. इसी क्रम में, भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े चेहरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरलम के चुनावी रणक्षेत्र में उतरकर मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज केरलम के दौरे पर रहेंगे. उनका यह दौरा न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए है, बल्कि दक्षिण भारत में ‘कमल’ खिलाने की भाजपा की दूरगामी रणनीति का एक अहम हिस्सा भी माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री पलक्कड़ में जनसभा को करेंगे सम्बोधित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे की शुरुआत केरलम के पलक्कड़ से करेंगे. जहां पीएम चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे. केरलम में भाजपा का एक मजबूत गढ़ माना जाता है. यहां आयोजित होने वाली विशाल चुनावी जनसभा न केवल कार्यकर्ताओं में जोश भरेगी, बल्कि राज्य के राजनीतिक समीकरणों को भी नई दिशा देने का प्रयास करेगी. केरल की राजनीति पारंपरिक रूप से एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन पलक्कड़ में भाजपा ने नगर पालिका चुनावों में जीत हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है.

इस दौरे के माध्यम से पीएम मोदी केरल के मतदाताओं को ‘विकास और सुशासन’ का विकल्प देना चाहते हैं. पलक्कड़ की धरती से दिया गया उनका संदेश न केवल स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित होगा, बल्कि राज्य में भाजपा की बढ़ती स्वीकार्यता को भी रेखांकित करेगा. इस चुनावी जनसभा में भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है, जो केरल के बदलते राजनीतिक मिजाज का संकेत हो सकती है.
पीएम मोदी त्रिशूर में करेंगे भव्य रोड शो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरलम के पलक्कड़ में एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करने के बाद पीएम त्रिशूर की सड़कों पर एक भव्य रोड शो करेंगे. त्रिशूर, जिसे केरल की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है, वहां पीएम मोदी का यह रोड शो महज एक शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि भाजपा की सोची-समझी रणनीतिक चाल है. त्रिशूर की सीट भाजपा के लिए इस बार प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है. धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र में पीएम मोदी की सक्रियता एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के पारंपरिक द्विध्रुवीय राजनीति के किले को ढहाने की कोशिश है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि त्रिशूर में पीएम मोदी का बढ़ता प्रभाव और हालिया रोड शो यह दर्शाता है कि भाजपा अब ईसाई और हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत कर रही है.

पीएम मोदी के इस दौरे ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा केरलम में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है. त्रिशूर जैसे महत्वपूर्ण केंद्र को चुनकर भाजपा ने राज्य की दोनों बड़ी शक्तियों को यह संकेत दे दिया है कि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद कड़ा होने वाला है. केरल में कमल खिलाने की कोशिश में जुटी भाजपा के लिए त्रिशूर का यह रोड शो एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
UDF और LDF के लुभावने वादे
केरलम की राजनीति अब उस मोड़ पर आ खड़ी हुई है जहां मुकाबला केवल दो ध्रुवों के बीच नहीं, बल्कि त्रिकोणीय संघर्ष में बदल गया हैं. जहां भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘हिंदुत्व और विकास’ के एजेंडे को धार दे रही है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने सत्ता वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इन दिनों ‘केरलम’ के विभिन्न क्षेत्रों के दौरे पर हैं, जहां वे सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं. वायनाड और तिरुवनंतपुरम की अपनी हालिया जनसभाओं में राहुल गांधी ने ‘पांच मुख्य गारंटियों’ की घोषणा कर चुनावी माहौल गर्मा दिया है। उन्होंने वादा किया है.
UDF के जनकल्याणकारी वादे
न्याय (NYAY) योजना: गरीब परिवारों को आर्थिक संबल देने के लिए मासिक सहायता दी जाएगी.
महिलाओं के लिए मुफ्त सफर: KSRTC बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी.
छात्राओं को भत्ता: कॉलेज जाने वाली छात्राओं को 1000 रुपये प्रति माह की वित्तीय मदद दी जाएगी.
पेंशन में बढ़ोतरी: कल्याणकारी पेंशन को बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह किया जाएगा.
स्वास्थ्य बीमा: पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के नाम पर 25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर हर परिवार को मिलेगा.
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ अपनी ‘किट्टू’ (राशन किट) राजनीति और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भरोसे दोबारा सत्ता में आने का दम भर रही है. वामपंथी दल केंद्र सरकार पर केरल के साथ वित्तीय भेदभाव करने का आरोप लगा रहे हैं। एलडीएफ का कहना है कि उन्होंने केरलम के मॉडल को दुनिया भर में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थापित किया है.
क्या मोदी फैक्टर बदलेगा इतिहास?
केरलम का चुनावी इतिहास गवाह रहा है कि यहां की जनता हर पांच साल में सत्ता बदलती रही है, लेकिन पिछले चुनाव में एलडीएफ ने दोबारा जीतकर इस परंपरा को तोड़ा था. अब भाजपा इस द्विदलीय राजनीति के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि केरलम में ईसाई और मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या होने के कारण भाजपा के लिए राह आसान नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री के बार-बार होने वाले दौरों और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे ने ईसाई समुदाय के एक वर्ग को भाजपा की ओर आकर्षित किया है. खासकर कलीसिया (Church) के नेताओं के साथ पीएम की मुलाकातों ने राज्य के समीकरणों को प्रभावित किया है. पीएम मोदी का यह दौरा न केवल चुनाव प्रचार है, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक युद्ध भी है, जिसका उद्देश्य यह दिखाना है कि दक्षिण भारत में भाजपा अब अछूत नहीं रही. आज की रैलियों और रोड शो में उमड़ी भीड़ क्या वोटों में तब्दील हो पाएगी? यह तो चुनावी नतीजे ही बताएंगे, लेकिन इतना साफ है कि केरलम के इस महाकुंभ में मुकाबला अब ‘कांटे की टक्कर’ में तब्दील हो चुका है.