नोएडा इंटरनेशनल ज़ेवर एयरपोर्ट: एशिया के सबसे बड़े और उत्तर प्रदेश का पांचवां नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनकर पूरी तरह से तैयार हो चुका है। आज प्रधानमंत्री मोदी नोएडा इंटरनेशनल ज़ेवर एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन करने जा रहे हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण में एक रनवे, टर्मिनल भवन, एटीसी टावर, कार्गो केंद्र और अन्य सुविधाएं यात्रियों को मिलेंगी। हालांकि, वर्ष 2040 तक दो रनवे वाले इस एयरपोर्ट से सालाना 7 करोड़ यात्रियों को सुविधा देने की उम्मीद है। देश के पांच रनवे वाले 4752 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत का सबसे विशाल एयरपोर्ट बनकर इतिहास रचेगा। नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार, एयरपोर्ट के तीनों चरणों के लिए किसानों से कुल 5428 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।
एयरपोर्ट के पहले फेज का निर्माण कार्य पूरी तरह तैयार
जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काम अब जमीन से उठकर आकाश में उड़ाने भरने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। पहले चरण के लिए 1334 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। वहीं दूसरे चरण के लिए जमीन अधिग्रहण और विस्थापन की प्रक्रिया अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। उत्तर प्रदेश के इस मेगा प्रोजेक्ट को दो मुख्य चरणों में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में दो रनवे बनाए जा रहे हैं, जबकि दूसरे चरण में कुल मिलाकर पांच रनवे विकसित करने की योजना है। पहले चरण के लिए राज्य सरकार ने करीब 4406 करोड़ रुपये खर्च कर लगभग 3300 एकड़ जमीन अधिग्रहित की है।

अगर बात लागत और क्षमता की करें, तो पहले चरण में ही दो रनवे के साथ ऐसा एयरपोर्ट तैयार किया जा रहा है, जो सालाना करीब सात करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा। इस चरण के निर्माण पर 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। पूरी परियोजना को चार उप-चरणों में बांटा गया है, जिनमें से पहले उप-चरण पर 11,077 करोड़ रुपये खर्च कर इसे उद्घाटन के लिए लगभग तैयार कर लिया गया है।
एयरपोर्ट का संचालन फिलहाल एक रनवे से शुरू
एयरपोर्ट के पहले चरण में फिलहाल एक रनवे से उड़ानों का संचालन किया जा रहा है, जिसकी सालाना यात्री क्षमता करीब 1.20 करोड़ रखी गई है। जैसे-जैसे परियोजना आगे बढ़ेगी, साल 2031 तक दो रनवे के साथ यह क्षमता बढ़कर लगभग तीन करोड़ यात्रियों तक पहुंचने की उम्मीद है।इसके बाद विकास के अगले चरणों में साल 2036 तक एयरपोर्ट की क्षमता करीब पांच करोड़ और 2040 तक बढ़कर सात करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष तक हो जाएगी। इस पूरे विस्तार और विकास कार्य पर तब तक कुल मिलाकर करीब 36,267 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगाया गया है।
1334 हेक्टेयर क्षेत्र में परियोजना का विकास
एयरपोर्ट के पहले और दूसरे रनवे का निर्माण 1334 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है। इसके बाद तीसरा रनवे 1365 हेक्टेयर, चौथा 1318 हेक्टेयर और पांचवां 735 हेक्टेयर जमीन पर विकसित होगा। पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुल मिलाकर 4752 हेक्टेयर जमीन रनवे निर्माण में इस्तेमाल होगी, जबकि 676 हेक्टेयर भूमि विस्थापन के लिए निर्धारित की गई है। इस तरह कुल 5428 हेक्टेयर (करीब 13,407 एकड़) जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।
गौरतलब है कि साल 2021 में एयरपोर्ट के शिलान्यास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो रनवे का मॉडल दिखाया गया था। अब 28 मार्च को होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम में उन्हें पांच रनवे वाला विस्तृत मॉडल प्रस्तुत किया जाएगा।
आधुनिक मल्टी-मॉडल इंटरनेशनल एविएशन हब रूप में विकसित
एयरपोर्ट को भविष्य में एक बड़े मल्टी-मॉडल इंटरनेशनल एविएशन हब के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करना और हवाई यातायात को बेहतर तरीके से संतुलित करना है। पांच रनवे की प्रस्तावित क्षमता के साथ यह परियोजना देश के सबसे बड़े एविएशन हब के रूप में उभरने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बदलते वैश्विक माहौल में यह एयरपोर्ट दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे अंतरराष्ट्रीय हब्स का मजबूत विकल्प बन सकता है और भारत की एयर कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा।