नई दिल्ली। देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और समावेशी मानव विकास के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की गई। बैठक का मुख्य विषय “विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास” रखा गया, जिसके तहत केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर दीर्घकालिक विकास की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।बैठक में प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब देश के प्रत्येक नागरिक को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के समान अवसर उपलब्ध हों।
विकास, रोजगार और कौशल पर फोकस
बैठक में दिसंबर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की प्रमुख सिफारिशों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इन सिफारिशों में प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत बनाने, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने तथा उच्च शिक्षा को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे।विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा किसी भी देश की मानव पूंजी के निर्माण की आधारशिला होती है। इसी कारण बैठक में बच्चों के शुरुआती वर्षों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। साथ ही विद्यालयों में आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल शिक्षा और व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रगति को देखते हुए भारत को भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करना होगा। इसके लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने, युवाओं को नई तकनीकों का प्रशिक्षण देने और रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। नीति आयोग का मानना है कि विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाकर देश को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति भी मजबूत होगी।
बैठक में खेल और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के महत्व पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेल, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे युवाओं में नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और आत्मविश्वास का विकास होता है।विकास के आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए रोजगार सृजन और उद्यमिता को भी प्राथमिकता दी गई। नीति आयोग ने ऐसे उपायों पर विचार किया जिनसे युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल सकें और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूती मिले। इसके अलावा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहित कर रोजगार के स्थायी अवसर सृजित करने पर भी जोर दिया गया।
विकसित भारत और समावेशी विकास पर चर्चा
समावेशी मानव विकास के लिए बैठक में चार प्रमुख स्तंभों को आधार बनाया गया। इनमें मजबूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल, उत्पादक रोजगार और उद्यमिता आधारित विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण के माध्यम से बेहतर जीवन स्तर तथा सभी नागरिकों के लिए समान अवसर और गरिमा सुनिश्चित करना शामिल है।नीति आयोग ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक न्याय, समान अवसर और जीवन की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है। इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।विशेषज्ञों के अनुसार यदि केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्रों में मिलकर प्रभावी कदम उठाती हैं, तो भारत अगले दो दशकों में एक मजबूत, समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। नीति आयोग की यह बैठक उसी व्यापक लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्णकदम मानी जा रही है।


























