ईरान में बढ़ती महंगाई, मुद्रा संकट और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। बीते तीन साल में यह सबसे बड़े प्रदर्शनों के रूप में सामने आए हैं। विरोध की इस लहर के बीच सेंट्रल बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि कई शहरों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कम से कम छह लोगों की मौत की खबर है। राजधानी तेहरान के सादी स्ट्रीट और ग्रैंड बाजार इलाके में व्यापारी और दुकानदार सड़कों पर उतर आए। कई जगह दुकानों के शटर डाउन रहे, जिससे कारोबारी गतिविधियां ठप पड़ गईं। इसी तरह इस्फहान, शिराज और मशहद जैसे बड़े शहरों में भी जनता ने सड़कों पर उतरकर आर्थिक नीतियों के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया।
मुद्रा गिरावट से भड़का गुस्सा, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी
प्रदर्शन उस समय उग्र हो उठे जब ईरानी रियाल ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया। रविवार को 1 डॉलर के मुकाबले रियाल 14.20 लाख के स्तर पर पहुंच गया, जो आर्थिक अस्थिरता की गंभीर तस्वीर पेश करता है। सोमवार को मामूली सुधार जरूर हुआ, पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
मुद्रा गिरावट का सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ा है। खाद्य पदार्थों की कीमतें 70% तक बढ़ गईं, जबकि कुल महंगाई दर दिसंबर में 42% के पार चली गई। इससे आम लोगों की जेब पर भारी बोझ बढ़ गया है। तेहरान के कुछ इलाकों में जैसे ही प्रदर्शन बढ़े, पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों द्वारा सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी रही, जबकि कई जगहों पर तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
कई शहरों में हिंसा, छह की मौत-प्रशासनिक इमारतें निशाने पर
गुरुवार को हालात अचानक बिगड़ गए जब कई शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार चहारमहल और बख्तियारी प्रांत के लोरदेगान शहर में दो लोग मारे गए, जबकि पड़ोसी लोरिस्तान प्रांत के अज़ना में तीन लोगों की मौत की खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सरकारी और प्रशासनिक इमारतों पर पथराव किया, जिनमें गवर्नर ऑफिस, मस्जिद, बैंक और टाउन हॉल शामिल थे। पुलिस ने जवाब में आंसू गैस के गोले छोड़े और कई लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्हें “सरगना” बताया गया।

इसी दौरान पश्चिमी शहर कौहदाश्त में एक बासिज सदस्य की मौत हो गई, जिसे सरकारी मीडिया ने “दंगाइयों की कार्रवाई” का नतीजा बताया। कई पुलिस और अर्धसैनिक कर्मियों के घायल होने की भी खबर है। हमीदान में प्रदर्शनकारियों ने एक मोटरसाइकिल में आग लगा दी, जिसे मस्जिद को जलाने की असफल कोशिश बताया गया। साथ ही तेहरान के एक जिले में 30 लोगों को एक समन्वित अभियान में गिरफ्तार किया गया।
सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव, जनता महंगाई से बेहाल
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दबाव में है। अमेरिका द्वारा लगाए गए तेल और बैंकिंग प्रतिबंधों ने हालात और खराब किए हैं। विदेशी मुद्रा की कमी के चलते रियाल की कीमत लगातार गिरती रही है।
2024 में देश का निर्यात 22.18 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 34.65 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया यानी भारी व्यापार घाटा। 2025 में यह 15 अरब डॉलर तक बढ़ चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया पेट्रोल कीमतों में बदलाव और टैक्स बढ़ोतरी की आशंका** ने जनता के आक्रोश को और भड़का दिया है। कई विश्लेषक इस स्थिति को हाइपरइन्फ्लेशन की दिशा में बढ़ता कदम बता रहे हैं।
जायज़ मांगें हैं लेकिन अराजकता बर्दाश्त नहीं’ सरकार
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने प्रदर्शनकारियों की आर्थिक शिकायतों को “जायज” बताते हुए तनाव कम करने की अपील की। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार को जनता की आर्थिक समस्याओं को हल करना होगा। उनका बयान खासतौर पर उस समय आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक प्रदर्शनकारी को पुलिस के सामने बैठकर विरोध करते देखा गया। इसे कई यूज़र्स ने “तियानमेन मोमेंट” जैसा बताया।
हालांकि अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अराजकता फैलाने की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकारी मीडिया ने कई जगह प्रदर्शनकारियों को “दंगाई” भी कहा जैसा 2022 के महसा अमीनी विरोध प्रदर्शनों के दौरान देखा गया था। ईरान में लंबे वीकेंड और अचानक घोषित बैंक हॉलिडे के बीच सरकार ने विरोध से किसी आधिकारिक संबंध से इनकार किया है। फिर भी सच यह है कि आर्थिक अस्थिरता, प्रतिबंध, बेरोजगारी और महंगाई मिलकर जनता के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। जब तक अर्थव्यवस्था स्थिर नहीं होती, रियाल की गिरावट और महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद कम ही है। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है।आर्थिक प्रबंधन और सार्वजनिक भरोसा बहाल करना, साथ ही हिंसा पर नियंत्रण बनाए रखना।


























