आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू (ASR) जिले की पहाड़ियों में वह सन्नाटा आज भी गूंज रहा है, जहां शुक्रवार तड़के भोर के साथ एक चीख, एक झटका और दर्द का सैलाब उतर आया। चिंतूरू और भद्राचलम के बीच घुमावदार घाट रोड पर श्रद्धालुओं से भरी एक निजी बस अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस भयानक दुर्घटना ने 9 लोगों की जान ले ली, जबकि कई यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। ठंडी पहाड़ी हवा में चीख-पुकार घुली, और ग्रामीण मदद के लिए दौड़ पड़े यह दृश्य रूह कंपा देने वाला था।
ASR जिला कलेक्टर दिनेश कुमार के अनुसार, हादसा शुक्रवार (12 दिसंबर) की सुबह करीब 3 बजे हुआ, जब बस भद्राचलम मंदिर में दर्शन कर लौट रहे यात्रियों को लेकर अन्नावरम की ओर जा रही थी। बस में लगभग 35 लोग सवार थे। पहाड़ी मोड़ पर अचानक ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया और देखते ही देखते वाहन गहरी खाई में जा समाया। बस का रजिस्ट्रेशन नंबर AP 39 UM 6543 बताया गया है, जो खाई में गिरने के बाद बुरी तरह क्षतिग्रस्त मिली।
पहाड़ी मोड़ों पर बरसी मौत, ड्राइवर को इलाके की नहीं थी जानकारी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बस के ड्राइवर को घाट रोड की ढलानों और तीखे मोड़ों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं थी। वह स्थानीय नहीं था और यही अनभिज्ञता इस दर्दनाक हादसे की बड़ी वजह मानी जा रही है। इलाके के लोगों ने बताया कि यह मार्ग बेहद खतरनाक है, जहां अनुभवी ड्राइवर भी सतर्कता बढ़ा देते हैं।
लेकिन दुर्भाग्य से जिस बस में यात्रियों ने सफर शुरू किया था, वह असावधानी और अनजान मार्ग का शिकार बन गई। जैसे ही बस खाई में गिरी, आसपास के गांवों के लोग मौके पर दौड़ पड़े। अंधेरा था, लेकिन टॉर्च और मोबाइल की फ्लैशलाइटों में राहत कार्य शुरू हुआ। घायलों को तुरंत भद्राचलम एरिया हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां कई यात्रियों की हालत नाजुक बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है क्योंकि कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हैं। बचाव अभियान अभी भी जारी है।
पीएम मोदी और सीएम नायडू ने जताया दुख, पीड़ित परिवारों को राहत राशि का ऐलान
दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक प्रकट किया और प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने घोषणा की कि मृतकों के परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता दी जाएगी, जबकि घायल यात्रियों को 50,000 रुपये देने का निर्णय लिया गया है।
प्रधानमंत्री ने लिखा, अल्लूरी सीताराम राजू जिले में बस दुर्घटना में जानमाल की हानि से व्यथित हूं। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।
मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भी X पर पोस्ट कर दुख व्यक्त किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर घायल को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए। नायडू ने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
श्रद्धालुओं की यात्रा बनी त्रासदी
बस के यात्री चित्तूर जिले के रहने वाले थे, जो भद्राचलम मंदिर के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। यह यात्रा उनके जीवन में शांति और आध्यात्मिकता भरने वाली थी, लेकिन पहाड़ी मोड़ पर मौत ने दस्तक दे दी। जिले के अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की जाँच की। सड़क पर बिखरे सामान, टूटा लोहे का ढांचा और यात्रियों के कपड़े इस बात की गवाही दे रहे थे कि हादसा कितना भयावह रहा होगा।

राज्य में प्रश्न उठे : क्या पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा पर्याप्त है?
यह हादसा फिर एक बार सवाल खड़ा करता है ?
क्या ऐसे खतरनाक पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं?
स्थानीय लोग बताते हैं कि इस मार्ग पर सड़क सुरक्षा चिह्न कम हैं और कई मोड़ों पर चेतावनी भी नहीं लगी है। विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि ऐसे रास्तों पर केवल अनुभवी और प्रशिक्षित ड्राइवर ही बस जैसी भारी गाड़ियों को संचालित कर सकते हैं। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसे मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाने और ड्राइवरों की विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था पर गंभीर कदम उठाए जाएंगे।
दर्द की रात, राहत की उम्मीद
आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों में रात का अंधेरा अभी तक पूरी तरह छंटा नहीं है—क्योंकि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, उनके दिलों में अंधेरा लंबे समय तक रहेगा। लेकिन इस त्रासदी के बीच राहत यही है कि कई घायलों की जान बचाई जा सकी, स्थानीय लोगों ने तत्परता से मदद की, और सरकार ने पीड़ितों के लिए राहत शुरू कर दी है। यह हादसा फिर एक बार याद दिलाता है कि यात्राओं की सुरक्षा और सड़क व्यवस्था केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु का सवाल है।


























