UP Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट के विस्तार को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है. लखनऊ में आज शाम करीब 3:30 बजे योगी की कैबिनेट का विस्तार होने जा रहा है. कैबिनेट विस्तार में रिक्त पदों पर ही नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी. यह विस्तार केवल नए चेहरों की सरकार में एंट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए भाजपा सामाजिक, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए संगठनात्मक समीकरणों को भी मजबूत करने का प्रयास करेगी।
सूत्रों का कहना है कि इस विस्तार में दलितों, पिछड़ों और पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां पार्टी अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है। इसके साथ ही भाजपा समाजवादी पार्टी से आए नेताओं और अखिलेश यादव से नाराज विधायकों को अपने पक्ष में लाने की रणनीति पर भी काम कर रही है। आपको बता दें. योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का मंत्रिमंडल विस्तार आखिरी हो सकता है क्योंकि 2027 की शुरुआत में ही यूपी विधानसभा के चुनाव होने हैं.

योगी सरकार ने इस विस्तार में क्षेत्र और जाति का विशेष ख्याल रखकर नए चेहरों को जगह दी जा सकती है. सूत्र बता रहे हैं कि पुराने मंत्रियों को हटाए बिना छह नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है. इस विस्तार में अवध और पश्चिमी क्षेत्रों को ज्यादा प्राथमिकता दी जा सकती है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी खुद पूर्वांचल से सांसद हैं. इसके अलावा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी पूर्वांचल से संबंधित हैं.
पूर्व मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी
मंत्रिमंडल विस्तार में संभावित चेहरों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, जिनमें सबसे प्रमुख नाम पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी का है. भूपेन्द्र चौधरी पहले योगी कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. वर्तमान में वे एमएलसी हैं और उनका कार्यकाल 2028 तक है.
दलित, पिछड़े वर्ग और सवर्ण वर्ग पर फोकस
योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में संभावित मंत्रियों की सूची में समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले मनोज पांडेय और पूजा पाल के नाम भी शामिल हैं. इस सूची में करीब 8-10 लोग हैं, जिनमें से 6 को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. इनमें कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, अशोक कटारिया, कैलाश राजपूत और हंसराज विश्वकर्मा के नाम सुर्खियों में हैं, हालांकि हंसराज विश्वकर्मा के अलावा कोई भी पूर्वांचल से नहीं है. मनोज पांडे को छोड़कर किसी का संबंध सवर्ण जाति से नहीं है.
मनोज पांडेय रायबरेली जिले की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं और वे मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले इकलौते सवर्ण विधायक हो सकते हैं. वे ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और अवध क्षेत्र के हैं. वहीं, पूजा पाल कौशांबी जिले की चायल सीट से विधायक हैं और ये गड़ेरिया समाज से आती है. वे पहले समाजवादी पार्टी से विधायक थीं, लेकिन अतीक अहमद की हत्या के बाद उन्होंने सीएम योगी के पक्ष में खुलकर बयान दिया था, जिससे सपा ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया.
सुरेंद्र दिलेर और कैलाश राजपूत के नामों की भी चर्चा है. सुरेंद्र दिलेर, जो अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक हैं, वाल्मीकि समाज के नेता हैं और उनका पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनैतिक है. वहीं, कैलाश राजपूत, जो कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक हैं, लोध जाति से आते हैं. तिर्वा इलाका समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है. इसके अलावा, सुरेश पासी का नाम भी सुर्खियों में है, लेकिन उनका मौका तब ही बन सकता है जब कृष्णा पासवान का नाम कटे, हालांकि इसकी संभावना कम लगती है.
सवर्णों की नाराज़गी को दूर करने पर विशेष ध्यान
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जाति और ओबीसी समुदाय को अधिक प्राथमिकता देने की योजना बना रही है. इसके साथ ही, ब्राह्मणों की नाराज़गी को समाप्त करने के लिए सवर्ण समाज से एक ब्राह्मण नेता को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. बीजेपी पासी जाति और अनुसूचित जातियों को लुभाने के लिए एससी वर्ग के नेताओं को मौका देने की रणनीति पर भी काम कर रही है.
उत्तर प्रदेश की राजनीति को चार प्रमुख हिस्सों में बांटा जाता है, पूर्वांचल, पश्चिमांचल, अवध और बुंदेलखंड. वर्तमान में, पूर्वांचल का प्रभाव सबसे अधिक है, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी से सांसद होने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर से आने के कारण. इसके अलावा, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी गोरखपुर के निवासी हैं और यहां से ही सांसद हैं. इस क्षेत्र से कई प्रमुख मंत्री भी आते हैं, जिनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है.
योगी सरकार में पूर्वांचल से कई मंत्री
वाराणसी से कुल तीन मंत्री हैं और इसके अलावा सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ संजय निषाद और अपना दल (सोनेलाल) के नेता आशीष पटेल भी पूर्वांचल से आते हैं. बलिया से दयाशंकर सिंह, सूर्य प्रताप शाही, एके शर्मा और दारा सिंह चौहान जैसे नेता भी इस क्षेत्र के हैं. इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में हालांकि पूर्वांचल को बहुत कुछ मिलने की संभावना कम दिखती है.
बीजेपी की जातिगत रणनीति
समाजवादी पार्टी द्वारा पीडीए के माध्यम से मुकाबला करने के मद्देनज़र, बीजेपी ने जातियों को साधने की रणनीति अपनाई है. विशेषकर ओबीसी और अनुसूचित जातियों के बीच अपने समर्थन को मजबूत करना बीजेपी की प्राथमिकता है. दलित वोटों के नुकसान के कारण बीजेपी लोकसभा चुनाव में कुछ हद तक नुकसान उठा चुकी थी और इस बार वह एससी समाज को यह संदेश देना चाहती है कि बीजेपी उन्हें उचित भागीदारी और सम्मान देती है.
पश्चिम यूपी पर भी फोकस
पश्चिम उत्तर प्रदेश को साधना बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती है. किसान आंदोलन के बाद जाट, गुर्जर, शाक्य, सैनी, कुर्मी और गौड़ यादव ओबीसी समुदायों को अपने पक्ष में लाने की बीजेपी ने कोशिश की है. इस बार, भूपेंद्र चौधरी को बड़ा मंत्रालय देने से बीजेपी जाट समुदाय को अपने साथ लाने की कोशिश करेगी. वहीं, अगर अशोक कटारिया मंत्री बनते हैं, तो गुर्जर समुदाय का भी एक और मंत्री योगी सरकार में शामिल हो जाएगा.
अखिलेश यादव का तंज
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तंज कसा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “दिल्ली से पर्ची आ गई”. साथ ही, उन्होंने महिला आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए यह भी कहा कि महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इस विस्तार में कौन से मंत्री होंगे और उन्हें कौन सा विभाग मिलेगा.


























