ईरान, तेहरान। ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन आर्थिक संकट, महंगाई और मुद्रा की गिरावट के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन अब ये सीधे शासन-विरोधी आंदोलन में बदल चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों और वाहनों को जलाया, जिससे पूरे देश में हिंसा की घटनाओं का सिलसिला जारी है। प्रदर्शनकारियों की संख्या राजधानी तेहरान समेत अन्य प्रमुख शहरों में बढ़ती जा रही है।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद ईरान सरकार ने देशभर में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। यह कदम विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए उठाया गया है, लेकिन इससे ईरान का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग पूरी तरह कट गया है। वर्ष 2022 के बाद यह पहला मौक़ा है जब ईरान को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। ये प्रदर्शन ईरान में बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और मुद्रा के अवमूल्यन के विरोध में हो रहे हैं। अमरीका से संचालित मानवाधिकार संस्था ओवरसीज ईरानियन राइट्स ग्रुप के अनुसार, इन प्रदर्शनों में 62 लोग मारे गए हैं। इनमें 14 सुरक्षाकर्मी और 48 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। सरकार ने दो हज़ार तीन सौ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। पूरे ईरान में इंटरनेट सेवा लगभग ठप्प है और डिजिटल सेंसरशिप सख्त़ी से लागू की गई है।
प्रदर्शन में 62 लोगों की मौत, खामेनेई ने विपक्ष पर आरोप लगाए
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन पिछले वर्ष 28 दिसम्बर को शुरू हुए थे। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने शुक्रवार को एक टेलीविजन संबोधन में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि वह प्रदर्शनकारियों के आगे नहीं झुकेंगे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर विदेशी विपक्षी समूहों और संयुक्त राज्य अमेरिका के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। खामेनेई के इस बयान के बाद, विरोध प्रदर्शन और भी उग्र हो गए हैं।

प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भवनों, अस्पतालों और मस्जिदों को भी निशाना बनाया है और सरकारी प्रसारण कार्यालयों सहित कई भवनों में आग लगा दी है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान रातभर चली हिंसा में कई पुलिस अधिकारियों की मौत की खबर है। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ ने यह जानकारी दी। सरकारी टीवी चैनल पर प्रदर्शनों की झड़पों और आगजनी की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों ने इमारतों, वाहनों और बैंकों में आग लगा दी है। इन प्रदर्शनों का कारण आर्थिक संकट है, जिसमें ईरान की मुद्रा रियाल ने डॉलर के मुकाबले अपना आधा मूल्य खो दिया है और महंगाई 40% से ऊपर जा चुकी है। हालांकि, अब ये प्रदर्शन सीधे तौर पर शासन के खिलाफ हो गए हैं और इसके कारण पूरे ईरान में स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
ईरान को ट्रंप की खुली धमकी
अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि राष्ट्रव्यापी आंदोलन के कारण ईरान गंभीर संकट में है और अमरीका इस मामले पर पैनी नज़र बनाए हुए है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेताओं को सख्त चेतावनी दी है कि अगर वे प्रदर्शनकारियों पर हिंसा जारी रखते हैं, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने कहा, “अगर ईरान फिर से निर्दोष लोगों को मारने की कोशिश करता है, तो हम दखल देंगे और उन्हें ऐसा नुकसान पहुंचाएंगे, जो उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ दे।” उन्होंने आगे कहा कि ईरान गंभीर संकट में है और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के आदेश भी दिए जा सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने विरोध प्रदर्शन पर जताई चिंता, अमेरिकी दखल पर ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
मानवाधिकार समूह HRANA ने बताया कि 28 दिसंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक 62 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें 14 सुरक्षाकर्मी और 48 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने इन प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की संख्या को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि दुनिया में कहीं भी लोगों को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का अधिकार है और सरकारों का कर्तव्य है कि वे इस अधिकार की रक्षा करें।
वहीं, ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत अमीर सईद इरावानी ने एक पत्र में अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है और प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाई ईरान में अस्थिरता और हिंसा को बढ़ावा दे रही है। इस सबके बीच, ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और सरकार की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। हिंसक प्रदर्शनों ने ईरान में एक बार फिर आंतरिक अस्थिरता को जन्म दिया है, और सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
ईरान में सशक्त शासन विरोधी आंदोलन
प्रदर्शनकारियों द्वारा जलाए गए वाहन और सरकारी इमारतें इसकी गवाही दे रही हैं कि यह विरोध केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि एक विशाल जनविद्रोह बन चुका है। अब यह आंदोलन ईरान के धार्मिक शासकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, जो इसके पहले कभी इतने बड़े विरोध का सामना नहीं कर पाए थे। ईरान के इस संकटपूर्ण हालात के बीच, दुनिया भर में इसके प्रभाव को लेकर चिंता का माहौल है और यह देखना होगा कि ईरान के शासक इस बढ़ते आंदोलन को किस तरह संभालते हैं।