Wednesday, March 11, 2026
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अजित पवार पंचतत्व में हुए विलीन, राजनीतिक गढ़ बारामती में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, बेटे जय पवार ने दी मुखाग्नि.

अजित पवार पंचतत्व में हुए विलीन, राजनीतिक गढ़ बारामती में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, बेटे जय पवार ने दी मुखाग्नि.

बारामती, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार को उनके राजनीतिक गढ़ बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। आपको बता दें उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार का बुधवार सुबह एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। बताया गया कि यह हादसा सुबह करीब 8.45 बजे हुआ, जिसमें अजित पवार के साथ उनके सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू सदस्य समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई। इस खबर के सामने आते ही पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई और राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक गहरा सदमा देखने को मिला। उनके निधन पर महाराष्ट्र में 3 दिन का राजकीय शोक रखा गया है। इस दौरान राज्यभर की सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। बारामती में अंतिम विदाई, उमड़ा जनसैलाब गुरुवार को अजित पवार का अंतिम संस्कार उनके राजनीतिक गढ़ बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान मैदान में किया गया। सुबह उनके पार्थिव शरीर को काटेवाड़ी स्थित उनके आवास लाया गया, जहां परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और समर्थकों ने अंतिम दर्शन किए। जैसे ही अंतिम यात्रा निकली, सड़कों के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। “अजित दादा अमर रहे” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा, जो इस बात का प्रमाण था कि जनता के बीच उनकी कितनी गहरी पकड़ और लोकप्रियता थी। अंतिम यात्रा के दौरान बारामती और आसपास के इलाकों में कई जगहों पर जाम की स्थिति भी देखने को मिली। हजारों लोग अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे। विद्या प्रतिष्ठान मैदान में हुए अंतिम संस्कार में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। उनके दोनों बेटों ने मुखाग्नि दी, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गहरे शोक में डूबे नजर आए। राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी, श्रद्धांजलियों का सैलाब अजित पवार के अंतिम संस्कार में देश और राज्य की कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हुईं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे और उनकी बेटी प्रणिति शिंदे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के साथ-साथ अभिनेता रितेश देशमुख भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे। एनसीपी, भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने अजित पवार को एक सशक्त प्रशासक, कुशल रणनीतिकार और जमीन से जुड़े नेता के रूप में याद किया। शरद पवार और सुनेत्रा पवार भावुक नजर आए, वहीं भतीजे रोहित पवार समेत परिवार के अन्य करीबी सदस्य पूरे समय मौजूद रहे। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों के नेताओं ने उनके योगदान को स्वीकार किया और उनके निधन को महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। सहकार से सत्ता तक: अजित पवार का राजनीतिक सफर “अजित दादा” के नाम से लोकप्रिय अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देओलाली प्रवरा में हुआ था। उन्होंने राजनीति की शुरुआत सहकारी आंदोलन से की। दुग्ध संघों, चीनी मिलों, सहकारी समितियों और बैंकों से जुड़े कार्यों के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण महाराष्ट्र की नब्ज को करीब से समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक पहचान की नींव बना। वर्ष 1991 में अजित पवार बारामती से लोकसभा सांसद चुने गए, लेकिन उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए सीट खाली कर दी और राज्य की राजनीति पर ध्यान केंद्रित किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। समय के साथ वे महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे। अजित पवार गैर-लगातार छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने और इस तरह वे राज्य के सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले नेताओं में शामिल हो गए। उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की सरकारों में उपमुख्यमंत्री के रूप में काम किया। इसके अलावा उन्होंने वित्त, सिंचाई और अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली और कई नीतिगत फैसलों में अहम भूमिका निभाई। उनकी पहचान एक सख्त लेकिन परिणाम देने वाले प्रशासक की रही। अपने निर्वाचन क्षेत्र बारामती से उनका रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी था। विकास कार्यों और स्थानीय मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें जनता के बीच खास स्थान दिलाया। विमान दुर्घटना में अजित पवार की असमय मृत्यु ने न केवल उनके परिवार और समर्थकों को, बल्कि पूरे महाराष्ट्र को गहरे शोक में डाल दिया है। उनके जाने से राज्य की राजनीति में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा। अजित पवार को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बारामती में दर्दनाक विमान हादसा : उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत, हादसे पर PM समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने जताया दुख.

बारामती में एक दर्दनाक विमान हादसा उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत.

बारामती में दर्दनाक विमान हादसा: महाराष्ट्र के बारामती में एक दर्दनाक विमान हादसा हुआ है, जहां उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजित पवार समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सीएम फडणवीस से घटना की जानकारी ली। हादसे की खबर मिलते ही बारामती समेत पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पुष्टि की है कि इस हादसे में विमान में सवार अजित पवार समेत सभी पांच यात्रियों की मौत हो गई। उपमुख्यमंत्री अजित पवार बुधवार को जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के बीच एक जनसभा में शामिल होने के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे। इसी दौरान उनका विमान बारामती के पास लैंडिंग के समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा सुबह करीब 9 बजे हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान लैंडिंग के दौरान नियंत्रण से बाहर हो गया, जिसके बाद वह ज़मीन से टकरा गया और उसमें भीषण आग लग गई। विमान में अजित पवार के अलावा दो क्रू मेंबर सहित कुल पांच लोग सवार थे। अधिकारियों के अनुसार, हादसे में कोई भी यात्री जीवित नहीं बचा। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में आग और धुएं के गुबार, विमान का बुरी तरह क्षतिग्रस्त मलबा और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में ले जाती एम्बुलेंस दिखाई दीं। स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंचकर हर संभव मदद करते नजर आए। पुणे के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के अनुसार, तीन शवों को बारामती मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, जबकि अन्य की पहचान की प्रक्रिया जारी है। हादसे की सूचना मिलते ही डीजीसीए अधिकारियों की एक टीम दुर्घटनास्थल पर पहुंच गई है। इसके साथ ही आपातकालीन सेवाएं और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं। दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। इधर, एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले, तथा उपमुख्यमंत्री अजित पवार का परिवार पत्नी सुनेत्रा पवार और पुत्र पार्थ पवार घटना के समय दिल्ली में मौजूद थे। जानकारी के अनुसार, प्रफुल्ल पटेल और पवार परिवार दिल्ली से बारामती के लिए रवाना हो चुके हैं। जानिए हादसे की पूरी कहानी: बारामती में कैसे हुआ विमान क्रैश ? बुधवार 28 जनवरी 2026 की सुबह करीब 8:45 बजे, महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट के पास एक चार्टर्ड विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह विमान मुंबई से बारामती की ओर जा रहा था, जहां अजित पवार को स्थानीय चुनावों के दृष्टिगत कई जनसभाओं में हिस्सा लेना था। विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान अचानक नियंत्रण खो बैठा और रनवे के पास ही क्रैश-लैंड हो गया। दुर्घटना के तुरंत बाद विमान भीषण आग में जल गया, और दुर्घटना-स्थल पर मौजूद लोगों ने देखा कि विमान आग के गोले की तरह फट गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान के मिटते ही चार-पांच बड़े धमाके हुए, जिससे बचाव प्रयास करना भी असंभव हो गया। आग इतनी तेज थी कि वहाँ मौजूद स्थानीय लोग भी विमान तक पहुँचकर मदद नहीं कर पाए। डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (AAIB) की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुँचीं और अभी दुर्घटना के कारणों की प्रारंभिक जाँच जारी है। मौसम की खराबी या तकनीकी विफलता भी कारणों में से किसी एक की भूमिका हो सकती है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।  दुर्घटना विमान में कौन-कौन थे मौजूद ? दुर्घटना में कुल 5 लोगों की मौत हुई है: किसी के भी जीवित बचने की सूचना नहीं है। विमान पूरी तरह से जलकर नष्ट हो चुका है। बारामती, पुणे सहित पूरे महाराष्ट्र में इस हादसे की सूचना मिलते ही गहरा शोक व्याप्त हो गया है, जहाँ जनता और राजनीतिक माहौल दोनों ही स्तब्ध हैं। पीएम मोदी और अमित शाह ने जताया दुख हादसे की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, तथा अन्य राष्ट्रवादी और केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और पवार परिवार से संपर्क कर दु:ख व्यक्त किया। उन्होंने इस दुर्घटना को गहरा आघात बताया और पवार के परिवार तथा समर्थकों के प्रति सांत्वना संदेश भेजा। पीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अजित पवार एक समर्पित लोकसेवक थे, जो लोगों के बीच गहरे सम्मान के पात्र थे। उन्होंने उनके कार्यों और गरीबों तथा पिछड़े वर्ग के लिए की गई सेवाओं की सराहना की। गृह मंत्री अमित शाह ने भी शोक जताते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार परिवार के साथ खड़ी है और आवश्यक हर संभव सहायता प्रदान करेगी। कौन थे अजित पवार ? अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के देओलाली प्रवरा (अहमदनगर) में हुआ था। वे भारतीय राजनीति की एक प्रभावशाली शख्सियत और महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक माने जाते थे। पवार छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे और अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने वित्त, सिंचाई, योजना और प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया। वे बारामती से आठ बार विधायक चुने गए और क्षेत्रीय विकास तथा प्रशासनिक पकड़ के लिए पहचाने जाते थे। वर्ष 2023 में उन्होंने शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी से अलग होकर अपनी राजनीतिक धारा बनाई और भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। वे न केवल एनसीपी के प्रमुख नेता थे, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उनकी पहचान रही। अजित पवार के आकस्मिक निधन से महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश की राजनीति में एक गहरी रिक्तता पैदा हो गई है। उनका जाना राज्य के राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। अजित पवार महाराष्ट्र के एक प्रमुख और सशक्त राजनेता थे, जिन्होंने लगभग चार दशकों से अधिक समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। राजनीतिक पहचान वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता थे और पार्टी में लंबे समय तक वित्त तथा प्रशासन के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। बाद में उन्होंने पार्टी नेतृत्व संभाला और प्रदेश की राजनीति में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई। पद और ज़िम्मेदारियाँ अजित पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ राज्य के वित्त मंत्री भी थे। उनकी रणनीतिक सोच और बजट-नीतियों के कारण उन्हें “राज्य के बजट के निर्माता” के रूप में भी

आज 77वां गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर होगा भारतीय सेनाओं का शानदार प्रदर्शन, PM मोदी ने दी देशवासियों को बधाई.

आज 77वां गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर होगा भारतीय सेनाओं का शानदार प्रदर्शन.

गणतंत्र दिवस 2026: आज भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, जो देश की लोकतांत्रिक प्रणाली, स्वतंत्रता और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में हमारी असाधारण यात्रा का प्रतीक है। यह दिन हमारे संविधान की सर्वोच्चता और भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को मनाने का अवसर है। इस साल गणतंत्र दिवस पर विशेष महत्व है क्योंकि यह ऐतिहासिक थीम “स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम” और “समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत” से जुड़ा हुआ है, जो देश की सांस्कृतिक धरोहर और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की अध्यक्षता में नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाले भव्य समारोह में देश भर से सैन्य टुकड़ियाँ, सांस्कृतिक दल और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भाग लेंगे। इस अवसर पर भारतीय सेना की शक्तियों का प्रदर्शन, विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व और इस वर्ष की थीम के अनुरूप देश की आत्मनिर्भरता के प्रयासों का जश्न मनाया जाएगा। यह गणतंत्र दिवस भारत के गौरवमयी इतिहास, समाज की विविधता और राष्ट्रीय एकता की मजबूती को और अधिक रेखांकित करता है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की दिशा में हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए, और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को गर्व से संजोए रखना चाहिए। गणतंत्र दिवस की परंपरा और इतिहास गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी, भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह दिन भारतीय संविधान के लागू होने का प्रतीक है, जो 26 जनवरी 1950 को प्रभावी हुआ। इस दिन भारत ने खुद को एक स्वतंत्र गणराज्य घोषित किया, और भारतीय लोकतंत्र की नींव रखी गई। हालांकि, गणतंत्र दिवस का महत्व इससे कहीं अधिक गहरा है, क्योंकि यह दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संघर्षों और सपनों से भी जुड़ा है। 1930 में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 26 जनवरी को “पूर्ण स्वराज दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इस दिन भारत ने ब्रिटिश साम्राज्य से पूरी स्वतंत्रता की मांग की थी। यह वह समय था जब महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानी भारतीय जनता को ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट कर रहे थे। इस दिन के ऐतिहासिक महत्व ने इसे स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बना दिया। गणतंत्र दिवस के रूप में 26 जनवरी को मनाया जाना इस विचार का प्रतीक है कि भारत ने केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं प्राप्त की, बल्कि यह अपनी सांस्कृतिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक धारा को भी मजबूत किया। भारतीय संविधान, जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, भारतीय जनता के अधिकारों, कर्तव्यों और स्वतंत्रता का संरक्षक बना। इस दिन भारतीय सेना की परेड, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और अन्य कार्यक्रम देश की शक्ति, एकता और विविधता का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। गणतंत्र दिवस न केवल भारत के लोकतांत्रिक संविधान का जश्न है, बल्कि यह भारतीय संघर्ष और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। यह दिन देशवासियों को एकजुट होने और अपने राष्ट्र के प्रति निष्ठा और श्रद्धा को फिर से याद दिलाने का अवसर प्रदान करता है। कर्तव्य पथ पर भव्य परेड: भारतीय संस्कृति और सैन्य शक्ति का संगम इस साल की परेड की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने से होगी। यह परेड भारतीय संविधान और भारतीय जनता के साहस, संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कर्तव्य पथ पर पहुँचने के बाद एक औपचारिक मार्च पास्ट में भाग लेंगी, जिसमें सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, सहायक नागरिक बलों, NCC और NSS की इकाइयाँ शामिल होंगी। इस वर्ष के गणतंत्र दिवस परेड में विशेष आकर्षण यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का होना है, जो इस परेड के मुख्य अतिथि होंगे। यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। परेड के दौरान विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियाँ प्रदर्शित की जाएंगी, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और विविध क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की बढ़ती ताकत को दिखाएँगी। इन झांकियों में वंदे मातरम के 150 वर्षों और विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के प्रतीक बदलावों को दर्शाया जाएगा। विशेष रूप से तीनों सेनाओं की झांकी “ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता के माध्यम से विजय” भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की एकता और सामूहिक शक्ति को प्रदर्शित करेगी। फ्लाईपास्ट और सांस्कृतिक प्रस्तुति: शक्ति और विविधता का संगम परेड का समापन 29 विमानों के शानदार फ्लाईपास्ट से होगा, जिसमें राफेल, Su-30, C-295, Mig-29, अपाचे जैसे अत्याधुनिक युद्धक विमान शामिल होंगे। ये विमान भारतीय सैन्य शक्ति की अद्वितीयता और देश की सुरक्षा में उसकी भूमिका को दर्शाते हैं। इसके बाद, 2,500 कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय सभ्यता और संस्कृति की विविधता को प्रदर्शित करेंगे। यह प्रदर्शनी भारत के विभिन्न हिस्सों की परंपराओं, कला और संस्कृति को एक मंच पर लाएगी। इसके अलावा, इस अवसर पर सरकार के द्वारा विशेष रूप से आमंत्रित किए गए 10,000 स्पेशल गेस्ट भी शामिल होंगे, जिनमें टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, स्टार्ट-अप, और आत्मनिर्भरता से जुड़े लोग प्रमुख होंगे। पीएम ने दी गणतंत्र दिवस की बधाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर देशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा कि सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। भारत के सम्मान, गौरव और महिमा का प्रतीक यह भव्य राष्ट्रीय पर्व आपके जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करे। विकसित भारत का संकल्प और भी मजबूत हो-यही मेरी दिली कामना है। गणतंत्र दिवस 2026: एक नई दिशा में गणतंत्र दिवस 2026 इस बार न केवल भारत की ऐतिहासिक यात्रा को याद करने का दिन होगा, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी प्रकट करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नेतृत्व में देश का यह गणतंत्र दिवस भारत की शक्ति, विविधता और लोकतंत्र की स्थिरता को दुनिया के सामने पेश करेगा। साथ ही, यह दिन यह भी दिखाएगा कि भारत ने किस प्रकार अपनी प्रगति को आत्मनिर्भरता की दिशा में मोड़ा है। गणतंत्र दिवस परेड हर भारतीय के दिल में गर्व और सम्मान की भावना पैदा करती है, क्योंकि यह केवल देश के संविधान का नहीं, बल्कि भारत की सम्पूर्ण संस्कृति, शक्ति, और एकता का उत्सव है।