Wednesday, March 11, 2026
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मौनी अमावस्या का पवित्र स्नान आज : आस्था की लहर से गूंज उठा देश, कड़ाके की ठंड में भी श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब.

मौनी अमावस्या का पवित्र स्नान आज : आस्था की लहर से गूंज उठा देश, कड़ाके की ठंड में भी श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब.

मौनी अमावस्या का पवित्र स्नान आज 2026 : आज माघ महीने की अमावस्या है, जिसे मौनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। माघ महीने की अमावस्या का संबंध सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं और आस्थाओं से गहरा है। इस दिन विशेष रूप से पूजा, व्रत, दान-पुण्य, नदी स्नान और मौन व्रत रखने की परंपरा है। इसे आत्मिक शुद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का दिन माना जाता है। मौनी अमावस्या का संबंध व्रत के साथ-साथ ध्यान और साधना से भी है। इस दिन विशेष रूप से मौन व्रत रखने की परंपरा है, जो मानसिक शांति और आत्म-नियंत्रण का प्रतीक है। इस दिन को धर्म, तप और साधना का प्रतीक माना जाता है, और लोग इस दिन नदी में स्नान करने के लिए जाते हैं, जिससे उनके पाप धुलकर पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, मौनी अमावस्या के दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। इस दिन किया गया दान अधिक फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु अपने सामर्थ्यानुसार गरीबों को अन्न, वस्त्र और अन्य सामग्री का दान करते हैं। इससे न केवल आत्मिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में समृद्धि और सुख भी आता है। हिंदू धर्म में यह दिन विशेष रूप से आत्म-प्रवृत्ति के लिए एक अवसर है, जब व्यक्ति अपने अंदर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करके अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में मोड़ने का प्रयास करता है। इस दिन का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक शांति को प्राप्त करने के रूप में भी देखा जाता है। जानें क्या हैं? मौनी अमावस्या का इतिहास और धार्मिक महत्व मौनी अमावस्या का महत्व प्राचीन समय से जुड़ा हुआ है और इसे विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन ब्रह्मा जी के मानस पुत्र मनु ऋषि ने मौन रहकर कठिन तपस्या की थी, जिसे ध्यान और साधना का सर्वोत्तम रूप माना जाता है। इस दिन मौन व्रत रखने का भी विशेष महत्व है, जो व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति की ओर मार्गदर्शन करता है। मौनी अमावस्या को पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है, जो न केवल शारीरिक शुद्धि के लिए, बल्कि मानसिक और आत्मिक शुद्धि के लिए भी किया जाता है। इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, और शिप्रा जैसी नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है, जो श्रद्धालुओं को पुण्य का लाभ प्रदान करती हैं। विशेष रूप से प्रयागराज में आयोजित माघ मेला इस दिन का सबसे प्रमुख आयोजन है, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उन्नति का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करता है। यह दिन आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक साधना के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। प्रयागराज माघ मेला: आस्था का महासंगम प्रयागराज का माघ मेला इस दिन विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बनता है। लाखों श्रद्धालु तड़के से ही त्रिवेणी संगम पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। संगम तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं ताकि मेला क्षेत्र में कोई भी अव्यवस्था न हो। 900 अतिरिक्त पुलिस जवानों की तैनाती की गई है, और घाटों पर मोटरबोट और जल पुलिस की टीमें निगरानी रखने के लिए तैनात की गई हैं। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एंबुलेंस और मेडिकल टीमों को भी प्रमुख स्थानों पर तैनात किया गया है। ऐसा अनुमान है कि आज साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में स्नान करने का अनुमान है. प्रयागराज के माघ मेले में इस दिन श्रद्धालुओं की श्रद्धा और आस्था का अनुपम रूप देखने को मिलता है। लाखों लोग पवित्र स्नान करते हैं, दान-पुण्य करते हैं, और मौन व्रत रखते हैं, जिससे उन्हें पुण्य लाभ प्राप्त होता है। मौनी अमावस्या का ज्योतिषीय महत्व ज्योतिष शास्त्र में भी मौनी अमावस्या का महत्वपूर्ण स्थान है। इसे विशेष रूप से अमावस्या का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। अमावस्या का दिन, चंद्रमा के निचले बिंदु के पास आने का समय होता है, जब चंद्रमा और सूर्य एक साथ होते हैं, और यह समय मानसिक शांति और आंतरिक विकास के लिए आदर्श होता है। इस दिन विशेष रूप से ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। इस दिन को लेकर एक और मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति माघी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करता है और दान-पुण्य करता है, तो उसके पाप धुल जाते हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्व रखता है, जो अपने जीवन में कोई बड़ा परिवर्तन चाहते हैं या जो अपने पुराने पापों से मुक्ति की चाह रखते हैं। आज के परिप्रेक्ष्य में मौनी अमावस्या का महत्व आज के समय में भी मौनी अमावस्या की परंपरा और महत्व बरकरार है। हालांकि आधुनिक जीवन शैली में बदलाव आए हैं, फिर भी इस दिन के धार्मिक महत्व और अनुष्ठानों में कोई कमी नहीं आई है। देश भर में विभिन्न तीर्थस्थलों जैसे वाराणसी, अयोध्या, हरिद्वार और प्रयागराज में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या इस दिन स्नान और पूजा करने के लिए पहुंच रहें है। मौनी अमावस्या का यह महापर्व आज भी लोगों को शांति, समृद्धि और आंतरिक संतुलन की दिशा में प्रेरित करता है। यही कारण है कि यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और मानसिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। मौनी अमावस्या एक पवित्र दिन है, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन में शांति और सकारात्मकता लाने के लिए भी एक आदर्श अवसर है। इस दिन के दौरान किए गए अच्छे कार्यों और साधना से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन भी प्राप्त होता है। चाहे वह प्रयागराज का माघ मेला हो, या फिर किसी अन्य स्थान पर किए गए पूजा-अर्चना के कार्य, माघी अमावस्या की आस्था और श्रद्धा आज भी अपने पवित्र रूप में जीवित है।

 नये साल पर मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, 2 लाख लोगों ने रामलला के दर्शन किए..

नये साल पर मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, 2 लाख लोगों ने रामलला के दर्शन किए.

Happy New Year Celebration 2026 : नववर्ष 2026 की शुरुआत देशभर में आस्था, श्रद्धा और अध्यात्म के अद्भुत संगम के साथ हुई। नए साल के पहले दिन धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर उमड़ी भारी भीड़ ने यह साफ कर दिया कि भारत की आत्मा आज भी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई है। मंदिरों में घंटियों की गूंज, मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच लोगों ने नए वर्ष का स्वागत किया और सुख-शांति, समृद्धि व मंगलकामनाओं की प्रार्थना की। श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में स्थित विश्वविख्यात बांके बिहारी मंदिर में नववर्ष के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मंदिर प्रशासन के अनुसार, दोपहर 12 बजे तक 1.5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ठाकुर बांके बिहारी के दर्शन कर लिए। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास विशेष सुरक्षा व व्यवस्था की गई।भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचने के लिए मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से 5 जनवरी तक दर्शन के लिए न आने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना आवश्यक है। वहीं, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भी आस्था का सागर उमड़ पड़ा। दोपहर 12 बजे तक 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। जय श्रीराम के नारों से पूरी अयोध्या नगरी गूंजती रही। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने नए साल की शुरुआत प्रभु श्रीराम के चरणों में माथा टेककर की। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं ताकि दर्शन व्यवस्था बाधित न हो। महाकाल और वैष्णो देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं का हुजूम, सुरक्षा के कड़े इंतजाम उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भी नववर्ष पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। भस्म आरती से लेकर सामान्य दर्शन तक मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। खास बात यह रही कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना समेत टीम की कुछ सदस्य भी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचीं। खिलाड़ियों की मौजूदगी से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। उधर, जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में भी लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे। अत्यधिक भीड़ और अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने अस्थायी रूप से रजिस्ट्रेशन रोक दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें। नए साल का पहला सूर्योदय और शुभकामनाओं का संदेश देश के विभिन्न हिस्सों से साल 2026 के पहले सूर्योदय की मनमोहक तस्वीरें सामने आई हैं। पहाड़ों से लेकर समुद्र तटों तक, हर जगह नए साल की सुबह ने उम्मीदों और सकारात्मकता का संदेश दिया।इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेताओं ने देशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा-“2026 की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। कामना करता हूं कि यह वर्ष हर किसी के लिए नई आशाएं, नए संकल्प और एक नया आत्मविश्वास लेकर आए। सभी को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे।”इसके साथ उन्होंने संस्कृत श्लोक के माध्यम से ज्ञान, वैराग्य, शौर्य, धैर्य और आत्मबल की कामना की। नववर्ष 2026 ने यह साबित कर दिया कि भारत में धर्म और आस्था केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, मंत्रोच्चार, दीप-धूप और प्रार्थनाओं के बीच नए साल की शुरुआत ने पूरे देश में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार किया है। यह नववर्ष हर व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए यही कामना है।

सीतापुर में पत्रकार की गोली मारकर हत्या, पिता ने दिया राघवेंद्र को मुखाग्नि.

पत्रकार हत्या सीतापुर NEWS : उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले पत्रकार हत्या सीतापुर NEWS : उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में शनिवार को पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी को दिन दहाड़े बीच रास्ते में गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद परिवार की मांग थी कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती तब तक हम दाह-संस्कार नहीं करेंगे।रविवार को पत्रकार का बरगदिया घाट पुल पर अंतिम संस्कार हुआ। राघवेंद्र बाजपेयी उनके पिता ने मुखाग्नि दी। घाट पर एडीएम नीतीश सिंह, विधायक शशांक त्रिवेदी व अन्य लोग मौजूद रहे। आपको बता दें कि राघवेंद्र बाजपेयी की दिनांक-08-03-2025 शनिवार को दोपहर लगभग 03:15 बजे अज्ञात बदमाशों ने गोली मार कर हत्या कर दी। इसके बाद एम्बुलेंस से राघवेंद्र बाजपेयी को सीतापुर के जिला अस्पताल ले जाया गया। वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रविवार के दिन परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन करने लगे। प्रशासन को सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल घटनास्थल पर पहुंच गई।