बारामती में दर्दनाक विमान हादसा: महाराष्ट्र के बारामती में एक दर्दनाक विमान हादसा हुआ है, जहां उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजित पवार समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सीएम फडणवीस से घटना की जानकारी ली। हादसे की खबर मिलते ही बारामती समेत पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई।
वहीं, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पुष्टि की है कि इस हादसे में विमान में सवार अजित पवार समेत सभी पांच यात्रियों की मौत हो गई। उपमुख्यमंत्री अजित पवार बुधवार को जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के बीच एक जनसभा में शामिल होने के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे। इसी दौरान उनका विमान बारामती के पास लैंडिंग के समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा सुबह करीब 9 बजे हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान लैंडिंग के दौरान नियंत्रण से बाहर हो गया, जिसके बाद वह ज़मीन से टकरा गया और उसमें भीषण आग लग गई। विमान में अजित पवार के अलावा दो क्रू मेंबर सहित कुल पांच लोग सवार थे।

अधिकारियों के अनुसार, हादसे में कोई भी यात्री जीवित नहीं बचा। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में आग और धुएं के गुबार, विमान का बुरी तरह क्षतिग्रस्त मलबा और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में ले जाती एम्बुलेंस दिखाई दीं। स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंचकर हर संभव मदद करते नजर आए। पुणे के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के अनुसार, तीन शवों को बारामती मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, जबकि अन्य की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
हादसे की सूचना मिलते ही डीजीसीए अधिकारियों की एक टीम दुर्घटनास्थल पर पहुंच गई है। इसके साथ ही आपातकालीन सेवाएं और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं। दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। इधर, एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले, तथा उपमुख्यमंत्री अजित पवार का परिवार पत्नी सुनेत्रा पवार और पुत्र पार्थ पवार घटना के समय दिल्ली में मौजूद थे। जानकारी के अनुसार, प्रफुल्ल पटेल और पवार परिवार दिल्ली से बारामती के लिए रवाना हो चुके हैं।
जानिए हादसे की पूरी कहानी: बारामती में कैसे हुआ विमान क्रैश ?
बुधवार 28 जनवरी 2026 की सुबह करीब 8:45 बजे, महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट के पास एक चार्टर्ड विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह विमान मुंबई से बारामती की ओर जा रहा था, जहां अजित पवार को स्थानीय चुनावों के दृष्टिगत कई जनसभाओं में हिस्सा लेना था। विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान अचानक नियंत्रण खो बैठा और रनवे के पास ही क्रैश-लैंड हो गया। दुर्घटना के तुरंत बाद विमान भीषण आग में जल गया, और दुर्घटना-स्थल पर मौजूद लोगों ने देखा कि विमान आग के गोले की तरह फट गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान के मिटते ही चार-पांच बड़े धमाके हुए, जिससे बचाव प्रयास करना भी असंभव हो गया। आग इतनी तेज थी कि वहाँ मौजूद स्थानीय लोग भी विमान तक पहुँचकर मदद नहीं कर पाए।

डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (AAIB) की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुँचीं और अभी दुर्घटना के कारणों की प्रारंभिक जाँच जारी है। मौसम की खराबी या तकनीकी विफलता भी कारणों में से किसी एक की भूमिका हो सकती है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
दुर्घटना विमान में कौन-कौन थे मौजूद ?
दुर्घटना में कुल 5 लोगों की मौत हुई है:
- अजित पवार- महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता
- पायलट और सह-पायलट- विमान के चालक दल के सदस्य
- सुरक्षा अधिकारी और सहायक स्टाफ- पवार के निजी सुरक्षा दल के सदस्य
किसी के भी जीवित बचने की सूचना नहीं है। विमान पूरी तरह से जलकर नष्ट हो चुका है। बारामती, पुणे सहित पूरे महाराष्ट्र में इस हादसे की सूचना मिलते ही गहरा शोक व्याप्त हो गया है, जहाँ जनता और राजनीतिक माहौल दोनों ही स्तब्ध हैं।
पीएम मोदी और अमित शाह ने जताया दुख
हादसे की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, तथा अन्य राष्ट्रवादी और केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और पवार परिवार से संपर्क कर दु:ख व्यक्त किया। उन्होंने इस दुर्घटना को गहरा आघात बताया और पवार के परिवार तथा समर्थकों के प्रति सांत्वना संदेश भेजा। पीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अजित पवार एक समर्पित लोकसेवक थे, जो लोगों के बीच गहरे सम्मान के पात्र थे। उन्होंने उनके कार्यों और गरीबों तथा पिछड़े वर्ग के लिए की गई सेवाओं की सराहना की।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी शोक जताते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार परिवार के साथ खड़ी है और आवश्यक हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
कौन थे अजित पवार ?
अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के देओलाली प्रवरा (अहमदनगर) में हुआ था। वे भारतीय राजनीति की एक प्रभावशाली शख्सियत और महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक माने जाते थे। पवार छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे और अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने वित्त, सिंचाई, योजना और प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया। वे बारामती से आठ बार विधायक चुने गए और क्षेत्रीय विकास तथा प्रशासनिक पकड़ के लिए पहचाने जाते थे।

वर्ष 2023 में उन्होंने शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी से अलग होकर अपनी राजनीतिक धारा बनाई और भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। वे न केवल एनसीपी के प्रमुख नेता थे, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उनकी पहचान रही। अजित पवार के आकस्मिक निधन से महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश की राजनीति में एक गहरी रिक्तता पैदा हो गई है। उनका जाना राज्य के राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। अजित पवार महाराष्ट्र के एक प्रमुख और सशक्त राजनेता थे, जिन्होंने लगभग चार दशकों से अधिक समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
राजनीतिक पहचान
वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता थे और पार्टी में लंबे समय तक वित्त तथा प्रशासन के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। बाद में उन्होंने पार्टी नेतृत्व संभाला और प्रदेश की राजनीति में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई।
पद और ज़िम्मेदारियाँ
अजित पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ राज्य के वित्त मंत्री भी थे। उनकी रणनीतिक सोच और बजट-नीतियों के कारण उन्हें “राज्य के बजट के निर्माता” के रूप में भी जाना जाता था।
राजनीतिक गठजोड़ और भूमिका
राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखा, लेकिन उनका प्रभाव महाराष्ट्र के शक्ति केंद्रों — विशेषकर बारामती, पुणे और कोआपरेटिव क्षेत्र में विशेष रूप से मजबूत रहा। समय-समय पर उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर गठबंधन और नेतृत्व की भूमिका निभाई। उनकी लोकप्रियता का कारण उनकी ग्रामीण और मध्यम वर्ग के प्रति प्रतिबद्धता थी। लोग उन्हें सीधे जुड़ने वाला, पारदर्शी और कर्मठ नेता मानते थे
महाराष्ट्र में शोक की लहर, राजनीतिक माहौल
अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक और सामाजिक वातावरण गंभीर है। राज्य सरकार ने तीन दिनों का शोक घोषित किया है जिसमें सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित रहेंगे और राष्ट्रीय ध्वज आधा-झुका रहेगा।
बारामती और आसपास क्षेत्रों में जनता संगठित रूप से नेता की याद में इकट्ठा हो रही है, वहीं विरोधी दलों ने भी इस दुर्घटना पर संवेदना जताई है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनके जाने से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा असर पड़ेगा, खासकर आगामी स्थानीय और ज़िला-पंचायत चुनावों में। यह दुखद हादसा न केवल एक जानी-पहचानी राजनीतिक शख्सियत के जाने की खबर है, बल्कि देश में विमान सुरक्षा और लैंडिंग प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाता है। जांच जारी है और उसके परिणाम आने पर ही हमें असली कारणों का पता चल पाएगा।