सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: आस्था, इतिहास और राष्ट्र गौरव का सहस्राब्दी उत्सव, ड्रोन की रोशनी में जगमगाया 1000 वर्षों का स्वाभिमान.

गुजरात, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व। वर्ष 2026 भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चेतना के लिए एक विशेष मील का पत्थर बनकर उभरा है। गुजरात के सोमनाथ मंदिर के इतिहास में यह वर्ष दो अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण स्मरणीय है। एक ओर, 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा किए गए आक्रमण को एक हजार वर्ष पूरे हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्वतंत्र भारत में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष भी इसी वर्ष पूर्ण हो गए हैं। इन दोनों ऐतिहासिक पड़ावों को स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का नाम दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय गुजरात दौरे के तहत सोमनाथ पहुंचे, जहां उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश की सांस्कृतिक विरासत को नमन किया। मंदिर नगरी को भव्य रूप से सजाया गया है और पूरा क्षेत्र आस्था, राष्ट्र गौरव और इतिहास के रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: आदि ज्योतिर्लिंग और सनातन आस्था का प्रतीक सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रदेव ने भगवान शिव की आराधना कर यहां इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी। यही कारण है कि सोमनाथ को चंद्रदेव से जुड़ा हुआ और ‘सोमेश्वर’ कहा गया। समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, स्थापत्य कला और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। प्राचीन काल में यह मंदिर अपनी समृद्धि, स्वर्ण कलशों और वैभव के लिए विश्वविख्यात था। दूर-दराज़ से यात्री, व्यापारी और श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते थे। 1026 का आक्रमण और टूटते-बनते इतिहास की गाथा 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर उसे ध्वस्त कर दिया। यह आक्रमण केवल एक मंदिर पर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा पर प्रहार के रूप में देखा जाता है। इसके बाद भी इतिहास के विभिन्न कालखंडों में सोमनाथ मंदिर को कई बार नष्ट करने का प्रयास किया गया।लेकिन हर बार यह मंदिर फिर से खड़ा हुआ, और पहले से अधिक मजबूत होकर। यही कारण है कि सोमनाथ को संघर्ष, साहस और पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है। हजार वर्षों के संघर्ष के बावजूद सोमनाथ आज भी आस्था और राष्ट्र गौरव का शक्तिशाली केंद्र बना हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि “सोमनाथ हमारी सभ्यता के साहस का गौरवशाली प्रतीक है। यहां आकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहा हूं।” उन्होंने इसे पूरे राष्ट्र के लिए स्वाभिमान का क्षण बताया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि सोमनाथ शाश्वत दिव्यता का प्रतीक है। इसकी पवित्र उपस्थिति पीढ़ियों से लोगों का मार्गदर्शन करती आ रही है। कल के कार्यक्रमों की कुछ झलकियाँ यहाँ प्रस्तुत हैं, जिनमें ओंकार मंत्र का जाप और ड्रोन शो शामिल हैं। स्वतंत्र भारत में पुनर्निर्माण और आधुनिक स्वाभिमान भारत की आज़ादी के बाद जब राष्ट्र अपनी पहचान, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना के पुनर्निर्माण की ओर अग्रसर हुआ, तब सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण एक ऐतिहासिक संकल्प के रूप में सामने आया। देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस पावन कार्य का बीड़ा उठाया। उनका यह निर्णय केवल एक धार्मिक संरचना के पुनर्निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि सदियों की पराधीनता के बाद भारत के टूटे हुए आत्मसम्मान, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय स्वाभिमान को पुनर्स्थापित करने का दृढ़ संकल्प था। सोमनाथ मंदिर, जो बार-बार आक्रमणों का साक्षी रहा, भारत की सहनशीलता, आस्था और पुनरुत्थान की शक्ति का प्रतीक है। आज़ादी के बाद इसका पुनर्निर्माण यह संदेश लेकर आया कि स्वतंत्र भारत अब अपने अतीत से कटकर नहीं, बल्कि अपनी जड़ों को सहेजते हुए भविष्य की ओर बढ़ेगा। 1951 में, तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की गरिमामयी उपस्थिति में सोमनाथ मंदिर को औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह अवसर केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि स्वतंत्र भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा का ऐतिहासिक और भावनात्मक पड़ाव था। यह आयोजन इस बात का प्रतीक बना कि भारत की स्वतंत्रता केवल राजनीतिक मुक्ति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सभ्यतागत चेतना के पुनर्निर्माण का भी उद्घोष है। सोमनाथ मंदिर का पुनः स्थापित होना राष्ट्र की सामूहिक स्मृति, गौरवशाली विरासत और अडिग आस्था का प्रतिबिंब बन गया। वर्ष 2026 में इस प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण होना, इस ऐतिहासिक यात्रा की निरंतरता और उसकी प्रासंगिकता को और भी सशक्त रूप से रेखांकित करता है। यह अवसर न केवल अतीत के संकल्प को स्मरण करने का है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारत की सांस्कृतिक शक्ति, आत्मसम्मान और पुनर्जागरण की प्रेरक गाथा सौंपने का भी प्रतीक है। स्वाभिमान पर्व: परंपरा, वीरता और आधुनिक प्रस्तुति 8 जनवरी 2026 से प्रारंभ हुआ सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 11 जनवरी 2026 तक पूरे श्रद्धा, गौरव और ऐतिहासिक चेतना के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर सोमनाथ मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक वैभव और राष्ट्रीय स्वाभिमान के रंगों से सराबोर नजर आ रहा है। पर्व के अंतर्गत आयोजित भव्य कार्यक्रमों ने न केवल श्रद्धालुओं को आस्था से जोड़ा, बल्कि भारत के गौरवशाली अतीत की स्मृतियों को भी जीवंत कर दिया। आधुनिक तकनीक और प्राचीन इतिहास के अद्भुत संगम के रूप में प्रस्तुत ड्रोन शो इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। ड्रोन के माध्यम से सोमनाथ के एक हजार वर्षों के संघर्ष, पुनर्निर्माण और गौरवपूर्ण इतिहास को आकाश में सजीव रूप में उकेरा गया। यह दृश्य केवल एक प्रस्तुति नहीं था, बल्कि भारत की अदम्य आस्था और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने श्रद्धालुओं और दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति ने पर्व को विशेष गरिमा प्रदान की। प्रधानमंत्री ने शौर्य यात्रा में सहभागिता कर उन वीर योद्धाओं को नमन किया, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस वीरता, त्याग और धर्मरक्षा की परंपरा का सशक्त संदेश देता नजर आया। इसके उपरांत प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और सार्वजनिक कार्यक्रम में देश को संबोधित किया। अपने संदेश में उन्होंने भारत की सभ्यता, संस्कृति और आत्मगौरव की निरंतरता पर बल दिया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि यह भारत की आस्था, संघर्ष और आत्मसम्मान की सहस्राब्दी गाथा है,
ईरान में आर्थिक संकट से उग्र हुआ विरोध प्रदर्शन, 62 लोगों की मौत, इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद, ईरान को ट्रंप की खुली धमकी.

ईरान, तेहरान। ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन आर्थिक संकट, महंगाई और मुद्रा की गिरावट के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन अब ये सीधे शासन-विरोधी आंदोलन में बदल चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों और वाहनों को जलाया, जिससे पूरे देश में हिंसा की घटनाओं का सिलसिला जारी है। प्रदर्शनकारियों की संख्या राजधानी तेहरान समेत अन्य प्रमुख शहरों में बढ़ती जा रही है। हिंसक प्रदर्शनों के बाद ईरान सरकार ने देशभर में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। यह कदम विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए उठाया गया है, लेकिन इससे ईरान का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग पूरी तरह कट गया है। वर्ष 2022 के बाद यह पहला मौक़ा है जब ईरान को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। ये प्रदर्शन ईरान में बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और मुद्रा के अवमूल्यन के विरोध में हो रहे हैं। अमरीका से संचालित मानवाधिकार संस्था ओवरसीज ईरानियन राइट्स ग्रुप के अनुसार, इन प्रदर्शनों में 62 लोग मारे गए हैं। इनमें 14 सुरक्षाकर्मी और 48 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। सरकार ने दो हज़ार तीन सौ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। पूरे ईरान में इंटरनेट सेवा लगभग ठप्प है और डिजिटल सेंसरशिप सख्त़ी से लागू की गई है। प्रदर्शन में 62 लोगों की मौत, खामेनेई ने विपक्ष पर आरोप लगाए ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन पिछले वर्ष 28 दिसम्बर को शुरू हुए थे। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने शुक्रवार को एक टेलीविजन संबोधन में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि वह प्रदर्शनकारियों के आगे नहीं झुकेंगे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर विदेशी विपक्षी समूहों और संयुक्त राज्य अमेरिका के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। खामेनेई के इस बयान के बाद, विरोध प्रदर्शन और भी उग्र हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भवनों, अस्पतालों और मस्जिदों को भी निशाना बनाया है और सरकारी प्रसारण कार्यालयों सहित कई भवनों में आग लगा दी है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान रातभर चली हिंसा में कई पुलिस अधिकारियों की मौत की खबर है। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ ने यह जानकारी दी। सरकारी टीवी चैनल पर प्रदर्शनों की झड़पों और आगजनी की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों ने इमारतों, वाहनों और बैंकों में आग लगा दी है। इन प्रदर्शनों का कारण आर्थिक संकट है, जिसमें ईरान की मुद्रा रियाल ने डॉलर के मुकाबले अपना आधा मूल्य खो दिया है और महंगाई 40% से ऊपर जा चुकी है। हालांकि, अब ये प्रदर्शन सीधे तौर पर शासन के खिलाफ हो गए हैं और इसके कारण पूरे ईरान में स्थिति और भी गंभीर हो गई है। ईरान को ट्रंप की खुली धमकी अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि राष्ट्रव्यापी आंदोलन के कारण ईरान गंभीर संकट में है और अमरीका इस मामले पर पैनी नज़र बनाए हुए है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेताओं को सख्त चेतावनी दी है कि अगर वे प्रदर्शनकारियों पर हिंसा जारी रखते हैं, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने कहा, “अगर ईरान फिर से निर्दोष लोगों को मारने की कोशिश करता है, तो हम दखल देंगे और उन्हें ऐसा नुकसान पहुंचाएंगे, जो उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ दे।” उन्होंने आगे कहा कि ईरान गंभीर संकट में है और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के आदेश भी दिए जा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने विरोध प्रदर्शन पर जताई चिंता, अमेरिकी दखल पर ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया मानवाधिकार समूह HRANA ने बताया कि 28 दिसंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक 62 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें 14 सुरक्षाकर्मी और 48 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने इन प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की संख्या को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि दुनिया में कहीं भी लोगों को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का अधिकार है और सरकारों का कर्तव्य है कि वे इस अधिकार की रक्षा करें। वहीं, ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत अमीर सईद इरावानी ने एक पत्र में अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है और प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाई ईरान में अस्थिरता और हिंसा को बढ़ावा दे रही है। इस सबके बीच, ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और सरकार की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। हिंसक प्रदर्शनों ने ईरान में एक बार फिर आंतरिक अस्थिरता को जन्म दिया है, और सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। ईरान में सशक्त शासन विरोधी आंदोलन प्रदर्शनकारियों द्वारा जलाए गए वाहन और सरकारी इमारतें इसकी गवाही दे रही हैं कि यह विरोध केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि एक विशाल जनविद्रोह बन चुका है। अब यह आंदोलन ईरान के धार्मिक शासकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, जो इसके पहले कभी इतने बड़े विरोध का सामना नहीं कर पाए थे। ईरान के इस संकटपूर्ण हालात के बीच, दुनिया भर में इसके प्रभाव को लेकर चिंता का माहौल है और यह देखना होगा कि ईरान के शासक इस बढ़ते आंदोलन को किस तरह संभालते हैं।