ढाका। बांग्लादेश की प्रमुख राजनेता और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा ज़िया का मंगलवार तड़के ढाका के एवरकेयर अस्पताल में निधन हो गया। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनका निधन फज्र की नमाज़ के ठीक बाद सुबह करीब छह बजे हुआ। BNP ने सभी से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने का अनुरोध किया।
खालिदा ज़िया लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उन्हें लीवर सिरोसिस, गठिया, मधुमेह, छाती और हृदय की समस्याएं थीं। उन्हें 23 नवंबर को अस्पताल में भर्ती किया गया था और पिछले 36 दिनों से उनका इलाज चल रहा था। उनकी देखरेख एक मेडिकल बोर्ड द्वारा की जा रही थी, जिसमें बांग्लादेश, ब्रिटेन, अमेरिका, चीन और ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ शामिल थे। इस महीने की शुरुआत में उन्हें विदेश भेजकर इलाज कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन उनकी नाजुक हालत के कारण यह संभव नहीं हो पाया।
बांग्लादेश की पहली महिला पीएम थीं खालिदा ज़िया
बेगम खालिदा ज़िया का जन्म 15 अगस्त 1945 को हुआ था। वे बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं। पति की हत्या के बाद खालिदा ज़िया ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और BNP का नेतृत्व संभाला। वह दो बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। पहली बार 1991 से 1996 और दूसरी बार 2001 से 2006 तक।

वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री भी थीं। जियाउर रहमान, जिनके नेतृत्व में BNP की स्थापना हुई थी, 1981 में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद से पार्टी की कमान खालिदा ज़िया के हाथ में रही। हाल ही में, उनके बेटे तारिक रहमान 17 सालों बाद देश लौटे हैं और BNP के एक्टिंग चेयरमैन के रूप में पार्टी की कमान संभाल रहे हैं।
कट्टरपंथियों के साथ थी सहानुभूति
खालिदा ज़िया का कार्यकाल विवादों से मुक्त नहीं रहा। उनके विरोधी, विशेषकर बांग्लादेश की वर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना, पर आरोप लगाते रहे कि खालिदा ज़िया ने अपने कार्यकाल में कट्टरपंथियों को बढ़ावा दिया। उनके शासन के दौरान जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी ताकतें मजबूत हुईं, जो बांग्लादेश की स्वतंत्रता संग्राम में पाकिस्तान सेना के साथ थीं और उनके नेताओं पर हत्या, बलात्कार और जनसंहार के आरोप हैं।
हालांकि, उनके पति जियाउर रहमान ने स्वतंत्रता संग्राम में पाकिस्तान सेना के खिलाफ बगावत की थी और वे भी देश के नायक माने जाते हैं। लेकिन BNP की स्थापना और आगे की राजनीति में खालिदा ज़िया का पक्ष कट्टरपंथी ताकतों के करीब माना गया।
प्रधानमंत्री के रूप में दो बार भारत दौरे और चुनावी परिदृश्य में बदलाव की छाप
प्रधानमंत्री रहते हुए खालिदा ज़िया दो बार भारत दौरे पर आईं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान 26 से 28 मई 1992 को सार्क देशों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आईं। दूसरी बार 2006 में वह द्विपक्षीय दौरे पर भारत आईं, जब देश में प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह की सरकार थी।
उनकी मौत ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल है और देश में आम चुनाव का ऐलान हो चुका है। उनके बेटे तारिक रहमान हाल ही में देश लौटे हैं और BNP की कमान संभाल रहे हैं, जिससे चुनावी राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
बेगम खालिदा ज़िया का निधन न केवल BNP के लिए बल्कि पूरे बांग्लादेश की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। 80 वर्ष की आयु में उनका जाना राजनीतिक पटल पर एक खालीपन छोड़ गया है, और आगामी चुनावी लड़ाई में उनके राजनीतिक उत्तराधिकार की भूमिका अब और अहम हो गई है।