बांग्लादेश में फिर हुई मॉब लिंचिंग, दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद अब सम्राट की बेरहमी से हत्या..

बांग्लादेश, ढाका । बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले और हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। गुरुवार को राजबाड़ी जिले के पांगशा उपजिला का है, जहां भीड़ ने एक हिंदू युवक को बेरहमी से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। मृतक की पहचान अमृत मंडल उर्फ सम्राट के रूप में हुई है। घटना बुधवार देर रात कालीमोहर यूनियन के होसेंदांगा गांव में हुई, जब भीड़ ने उन्हें घेरकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर घायल सम्राट को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें बचाया नहीं जा सका। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले नहीं थम रहे, पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी वारदातें. सूत्रों के अनुसार, यह घटना रात करीब 11 बजे उस समय हुई जब सम्राट पर जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के आरोप लगे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट द डेली स्टार के मुताबिक, सम्राट के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें एक हत्या का मामला भी शामिल बताया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि सम्राट लंबे समय से एक आपराधिक गैंग से जुड़ा था और हाल ही में भारत में रहने के बाद अपने गांव लौटा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सम्राट ने गांव के ही शाहिदुल इस्लाम से पैसों की मांग की और बुधवार रात अपने साथियों के साथ पैसे लेने उसके घर पहुंचा। घर वालों द्वारा शोर मचाने के बाद लोग मौके पर जुटने लगे और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई। भीड़ ने सम्राट को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया और उसके साथी मौके से भाग निकले। पुलिस ने बाद में एक आरोपी मोहम्मद सलीम को हथियारों सहित हिरासत में लिया है। उसके पास से एक पिस्टल और एक देसी बंदूक भी बरामद की गई है। सम्राट को गंभीर चोटें आने के बाद उसे तुरंत पांगशा उपजिला हेल्थ कॉम्प्लेक्स ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने गुरुवार सुबह करीब 2 बजे उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और कहा है कि आगे की कार्रवाई की जा रही है। लगातार बढ़ रही हिंसा, हिंदू समुदाय में दहशत यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब बांग्लादेश में हाल के दिनों में भीड़ द्वारा हिंसा और लिंचिंग के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इससे पहले मैमनसिंह जिले में दीपू चंद्र दास नाम के एक हिंदू युवक को ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने न सिर्फ पीट-पीटकर मार डाला था, बल्कि उसके शरीर को फांसी पर लटकाकर आग भी लगा दी थी। बाद में अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि ईशनिंदा का कोई सबूत नहीं मिला था। इन घटनाओं के बाद भारत ने बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को एक सप्ताह में दूसरी बार तलब किया, और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई। भारत के कई हिस्सों में भी इस मुद्दे पर प्रदर्शन हुए हैं। वहीं, बांग्लादेश के एजुकेशन एडवाइजर सीआर अबरार ने दीपू दास के परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी और मदद का आश्वासन दिया। लगातार जारी हिंसा के कारण बांग्लादेश के हिंदू समुदाय में दहशत और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। ढाका से लेकर चटगांव और अन्य जिलों तक भीड़तंत्र का यह दौर कहीं न कहीं कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में, कड़े कदमों की मांग हालांकि पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई दिखाते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भीड़ को इस तरह हिंसा करने का हौसला कैसे मिल रहा है। बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि कानून की पकड़ कमजोर पड़ती नजर आ रही है और भीड़तंत्र को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हिंसा के पीछे किसने भड़काने का काम किया। वहीं, मृतक के परिजनों और हिंदू समुदाय के लोगों ने न्याय की मांग की है।