Wednesday, March 11, 2026
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बांग्लादेश में अस्थिरता के बीच सियासी हलचल, अशांति और हिंसा के बीच राजनीतिक सत्ता में तारिक़ रहमान की वापसी..

बांग्लादेश इस समय गहरे राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसा के दौर से गुजर रहा है। देश में जारी अशांति ने सत्ता

बांग्लादेश में अस्थिरता के बीच सियासी हलचल, अशांति और हिंसा के बीच राजनीतिक सत्ता में तारिक़ रहमान की वापसी
बांग्लादेश में अस्थिरता के बीच सियासी हलचल, अशांति और हिंसा के बीच राजनीतिक सत्ता में तारिक़ रहमान की वापसी-फाइल फोटो (सोशल मीडिया)
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बांग्लादेश इस समय गहरे राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसा के दौर से गुजर रहा है। देश में जारी अशांति ने सत्ता के समीकरणों को उलझा दिया है और यह साफ नहीं है कि सियासत किस करवट बैठेगी। मौजूदा अंतरिम सरकार पर विपक्ष द्वारा लगातार गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी चेयरमैन और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक़ रहमान की वापसी ने राजनीतिक सरगर्मियां और तेज कर दी हैं। 17 साल बाद लंदन से लौट रहे तारिक रहमान का स्वागत करने के लिए बीएनपी कार्यकर्ता कड़ी सुरक्षा के बीच अलग-अलग जगहों पर तैयारी कर रहे हैं।

विद्रोह, गिरफ्तारी और निर्वासन: रहमान के अतीत की गूंज

तारिक रहमान का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, जब बांग्लादेश अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा था, उस वक्त रहमान, उनकी मां खालिदा जिया, भाई और परिवार के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी आधार पर बीएनपी उन्हें बांग्लादेश की आजादी के संघर्ष का “सबसे कम उम्र का कैदी” बताती है।

विद्रोह, गिरफ्तारी और निर्वासन: रहमान के अतीत की गूंज-फाइल फोटो (सोशल मीडिया)

लेकिन 2004 के अगस्त में ढाका में हुए ग्रेनेड हमले ने उनके राजनीतिक जीवन को एक नए विवाद में धकेल दिया। इस हमले में आवामी लीग की एक रैली को निशाना बनाया गया था, जिसमें 24 लोगों की मौत हुई और तत्कालीन विपक्ष की नेता शेख हसीना बाल-बाल बचीं। इस मामले में तारिक रहमान का नाम सामने आया, हालांकि उनकी पार्टी बीएनपी ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया।

साल 2007 में सेना समर्थित अंतरिम सरकार के दौरान जारी भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में तारिक रहमान को गिरफ्तार किया गया। बाद में बीमारी के इलाज के नाम पर उन्हें लंदन जाने की इजाजत मिली और तब से वे वहीं रहकर राजनीतिक निर्वासन जैसा जीवन जी रहे थे।

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद का सियासी खालीपन

हाल के महीनों में राजनीतिक हिंसा, प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और आरोप-प्रत्यारोपों ने बांग्लादेश के हालात को अस्थिर बना दिया है। शेख हसीना के देश छोड़ने, अवामी लीग पर बैन और कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते प्रभाव ने सियासी परिदृश्य को और जटिल बना दिया है। ऐसे समय में जब बीएनपी अपनी खोई हुई ज़मीन वापस पाने की कोशिश में है, वहीं इसके कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।

इन राजनीतिक बदलावों के बीच 2026 में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव बेहद अहम हो गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि रहमान की वापसी बीएनपी के लिए संगठनात्मक मजबूती का संदेश है और विपक्षी एकजुटता को प्रेरित कर सकती है। दूसरी ओर, राजनीतिक हिंसा और तनाव में वृद्धि से लोकतांत्रिक माहौल के और कमजोर पड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।

विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

बांग्लादेश में जारी उथल-पुथल का असर केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। दक्षिण एशिया क्षेत्र में यह देश रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भारत के साथ ऐतिहासिक, भौगोलिक और आर्थिक जुड़ाव के कारण ढाका की राजनीतिक स्थिरता नई दिल्ली के लिए भी अहम है।

विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर- फाइल फोटो (सोशल मीडिया)

शेख हसीना के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध अपेक्षाकृत मजबूत रहे। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और आर्थिक संपर्क बढ़ाने पर काफी प्रगति हुई। अब जबकि देश राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में फंसा है, नई सत्ता संरचना किस दिशा में जाएगी यह सवाल भारत सहित कई देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

तारिक रहमान की वापसी से अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ विश्लेषक आशंका जता रहे हैं कि अगर राजनीतिक हिंसा नहीं थमी, तो इसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा, बल्कि विदेशी निवेश और विकास परियोजनाओं पर भी रहेगा। वहीं, पश्चिमी देश लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और शांतिपूर्ण राजनीतिक संक्रमण का समर्थन करते रहे हैं, इसलिए वे बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं।

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