उत्तर प्रदेश, लखनऊ। राजधानी लखनऊ के बसंतकुंज योजना में विकसित 65 एकड़ क्षेत्र में तैयार राष्ट्र प्रेरणा स्थल को 25 दिसंबर, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भव्य रूप से लोकार्पण किया जाएगा। यह कार्यक्रम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्तियों का अनावरण भी करेंगे।
राष्ट्र नायकों को समर्पित प्रेरणा स्थल
राष्ट्र प्रेरणा स्थल को देश की तीन प्रमुख राष्ट्रवादी विभूतियों को समर्पित किया गया है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रीय अखंडता की नींव रखी, पं. दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद के जरिए भारतीय राजनीतिक चिंतन को नया आयाम दिया, जबकि अटल बिहारी वाजपेयी ने सुशासन, संवाद और राष्ट्रवाद को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ा।

65 एकड़ में फैले इस स्थल का लेआउट कमल के आकार में है और इसमें तीनों नेताओं की 65-65 फीट ऊँची प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं। परिसर में आधुनिक म्यूजियम, पांच गैलरियां और पांच कोर्टयार्ड हैं, जिनमें ऑडियो-विजुअल प्रदर्शनी और डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से नागरिकों और छात्रों को राष्ट्र नायकों के जीवन और योगदान से जोड़ा जाएगा।
लखनऊ को वैचारिक केंद्र बनाने की पहल
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थल केवल स्मारक नहीं है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक विरासत को संस्थागत रूप देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उद्घाटन इस पहल को राजनीतिक और प्रतीकात्मक दृष्टि से और अधिक महत्व देता है।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा का प्रतीक बताया जा रहा है। स्थल पर विकसित म्यूजियम और गैलरी के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय राजनीति की वैचारिक धारा से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं के साथ तैयार स्थल
सुरक्षा, पार्किंग और यातायात के सभी प्रबंध पूरी तरह से सुनिश्चित किए गए हैं। परिसर में डिजिटल और इंटरैक्टिव माध्यमों के साथ-साथ ऑडियो-वीजुअल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे आगंतुकों को एक शिक्षाप्रेरक और जानकारीपूर्ण अनुभव मिलेगा।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह स्थल उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में बीजेपी की वैचारिक पहचान को मजबूत करने का एक रणनीतिक कदम है। विशेषकर अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर इसका उद्घाटन, राष्ट्रवाद और राजनीतिक स्मृति को जोड़ने वाला प्रतीकात्मक संदेश देता है।
मुख्य बातें:-
- राष्ट्र प्रेरणा स्थल को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित किया गया।
- स्थल का क्षेत्रफल 65 एकड़ है और कमल के आकार का लेआउट है।
- तीनों नेताओं की 65-65 फीट ऊँची मूर्तियाँ स्थापित हैं।
- परिसर में आधुनिक म्यूजियम, 5 गैलरियां, 5 कोर्टयार्ड और ऑडियो-विजुअल प्रदर्शनी मौजूद हैं।
- सुरक्षा, पार्किंग और यातायात व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार हैं।
- यह स्थल राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रवाद के शिक्षा-केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
विशेषताएं:-
- अत्याधुनिक म्यूजियम में डिजिटल डिस्प्ले और इंटरैक्टिव माध्यम।
- राष्ट्र नायकों के जीवन, संघर्ष और योगदान को प्रदर्शित करने वाली गैलरियां।
- परिसर का कमल के आकार का वास्तुशिल्प।
- तीनों विभूतियों की विशाल मूर्तियाँ।
- छात्र और नागरिकों के लिए प्रेरणादायक शिक्षा केंद्र।
कुल मिलाकर, 25 दिसंबर को लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और वैचारिक घटना के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल स्मारक के रूप में बल्कि राजनीतिक विमर्श और राष्ट्रवादी चेतना के केंद्र के रूप में भी देश की राजनीति और लखनऊ की वैचारिक पहचान को नया आयाम देगा।