Wednesday, March 11, 2026
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काशी तमिल संगमम् 4.0 की भव्य शुरुआत आज, सीएम योगी सहित तमिलनाडु के राज्यपाल होंगे शामिल..

काशी तमिल संगमम् 4.0 की भव्य शुरुआत : उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक आत्मा को जोड़ने वाला काशी तमिल

काशी तमिल संगमम् 4.0 की भव्य शुरुआत- सोशल मीडिया
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काशी तमिल संगमम् 4.0 की भव्य शुरुआत : उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक आत्मा को जोड़ने वाला काशी तमिल संगमम् आज अपने चौथे संस्करण का शुभारंभ होने जा रहा है। सदियों पुरानी आध्यात्मिक यात्राओं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और साझा विरासत का यह संगम एक बार फिर काशी के घाटों पर अपनी विरासत की अद्भुत दृश्य को प्रद्रशित करेगा। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक चलती-फिरती सांस्कृतिक यात्रा है, जिसकी परिकल्पना वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। उद्देश्य था उत्तर और दक्षिण भारत के बीच भावनात्मक, सांस्कृतिक और भाषाई रिश्तों को फिर से जीवंत करना, वह पुल फिर से मजबूत करना जिसने भारतीय सभ्यता को हजारों वर्षों से एक सूत्र में पिरोया है।

अनेक रंग, एक पहचान: 1400 प्रतिनिधियों का महायात्रा संगम


तीन सफल संस्करणों के बाद आज से काशी तमिल संगमम् का यह चौथे संस्करण का आयोजन होन जा रहा हैं। इस कार्यक्रम ने जो सांस्कृतिक और भावनात्मक रिश्तों की नींव उत्तर और दक्षिण के बीच रखी थी, वो लगातार मजबूत होती जा रही है। लगातार अलग अलग संस्करणों में तमिलनाडु से अलग अलग ग्रुप जिसमें विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, आध्यात्मिक जन, साहित्य और शिल्प से जुड़े हुए लोग शामिल हो रहे हैं। इस बार भी ऐसे सात ग्रुप आ रहे हैं, जिसमें लगभग 1400 प्रतिनिधि शामिल होंगे। ये ग्रुप वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या के दर्शन करने के साथ काशी में मुख्य कल्चरल और स्पिरिचुअल जगहों जैसे काशी विश्वनाथ मंदिर, केदार घाट, सारनाथ और तमिल हेरिटेज पॉकेट्स का दौरा भी करेगें ।

नमो घाट से गूंजेगी एकता की ध्वनि

आज दोपहर के बाद नमो घाट पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में इस वर्ष के संगमम् का औपचारिक उद्घाटन होगा। जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक भव्य सांस्कृतिक समारोह के बीच इसकी शुरुआत करेंगे। कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तथा पुडुचेरी और तमिलनाडु के राज्यपाल के भी मौजूद होने की संभावना है। काशी तमिल संगमम् 4.0 आज केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं यह भारत की मूल आत्मा का उत्सव है। यह संदेश है कि देश की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। जब तमिल परंपरा और काशी की आध्यात्मिकता एक मंच पर मिलकर गूंजती हैं, तो केवल दो संस्कृतियाँ नहीं, बल्कि पूरा भारत एकाकार होकर उभर आता है।

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